लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (एआईएसएससी) के अध्यक्ष सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू को बधाई दी। उन्होंने कहा, 'यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है। सरकार ने मुसलमानों के हित में बड़ा कदम उठाया है। मुझे उम्मीद है कि सरकार मुसलमानों, खासकर वंचित मुसलमानों, महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए योजनाएं पेश करेगी।'
'288 के मुकाबले 232 मतों से पारित'
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए सदन की बैठक रात करीब 2 बजे तक जारी रही और आखिरकार विधेयक को 288 के मुकाबले 232 मतों से सदन की मंजूरी मिल गई। इसके अलावा मुस्लिम वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024, जो मुस्लिम वक्फ अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है, को भी सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। जब विधेयक पर मतदान हो रहा था, तब सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे।
'इस विधेयक से किसी को नुकसान नहीं होगा'
चर्चा का जवाब देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार समाज के हर वर्ग का ख्याल रखती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि इस विधेयक से किसी को नुकसान नहीं होगा। इस विधेयक से करोड़ों मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को फायदा होगा। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा, ताकि वक्फ संपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल हो सके और उनका दुरुपयोग रोका जा सके।'
असदुद्दीन ओवैसी ने बिल की कॉपी फाड़ी
वहीं, विपक्ष ने इस बिल पर कई आपत्तियां उठाईं। विपक्ष ने कहा कि यह वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करेगा और मुसलमानों के धार्मिक मामलों में सरकार का अतिक्रमण होगा। एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध किया और अपनी बात रखने के बाद आखिर में बिल की कॉपी फाड़ दी।
'भारत सरकार के कानून को सभी को मानना होगा'
इससे पहले, चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह भारत सरकार का कानून है और सभी को इसे मानना होगा। उन्होंने विपक्ष पर समाज में भ्रम फैलाने और मुसलमानों को डराकर उनका वोट बैंक बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर विपक्ष के दावों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सीएए लागू होने के बाद किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं गई है और अनुच्छेद 370 हटने के बाद उमर अब्दुल्ला जैसे नेता चुनाव जीतकर जम्मू-कश्मीर वापस लौटे हैं, जिससे पता चलता है कि हालात सुधरे हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कम हुआ है तथा विकास एवं पर्यटन बढ़ा है।
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