आंखों का फड़कना अक्सर अशुभ माना जाता है, लेकिन इसके पीछे का असली कारण क्या है? यह जानना जरूरी है कि आंखों का फड़कना मांसपेशियों की सेहत से जुड़ा होता है। जब शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियां संकुचित होती हैं, तो वह फड़कने लगती हैं।
आंखों का फड़कना क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं, तो वे फड़कने लगती हैं। यह आमतौर पर पलकों में होता है। हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह इतना गंभीर हो सकता है कि उनकी आंखें पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, जिसे ब्लेफेरोस्पाज्म कहा जाता है।
आंखों के फड़कने के कारण
आंखों के फड़कने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे नींद की कमी, थकान, आंखों पर दबाव, खुजली, दवाओं के साइड इफेक्ट और शराब का अधिक सेवन। इसके अलावा, ड्राई आंखें या पलकों में सूजन भी फड़कने का कारण बन सकती हैं।
आंखों के फड़कने के खतरे
लगातार आंखों के फड़कने से दृष्टि कमजोर हो सकती है, जिससे देखने में समस्या आ सकती है। इसके अलावा, यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर या फेशियल पाल्सी का संकेत भी हो सकता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
आंखों का फड़कना आमतौर पर गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण जैसे तेज फड़कना, सूजन, या आंखों का पानी गिरना, डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
आंखों के फड़कने का इलाज
यदि आंखों का फड़कना अपने आप ठीक नहीं होता है, तो खान-पान और दिनचर्या में बदलाव करना आवश्यक है। नियमित व्यायाम, कैफीन का कम सेवन, और तनाव से बचना फायदेमंद हो सकता है।
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