Himachali Khabar (Supreme Court) देश में एक समय सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चकबंदी का फैसला किया था। इसके अनुसार जिनके पास ज्यादा संपत्ति थी, उनकी प्रोपर्टी को सरकार ने कब्जा करके जरूरतमंदों को बांटा था। अब सवाल आता है कि क्या सरकार अब भी ऐसा कर सकती है।
आपने देखा होगा कि सरकारें किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर आती है, जैसे हाईवे बनाना, एयरपोर्ट बनाना या कोई बिजली संयंत्र लगाना, सभी के लिए जमीन का अधिग्रहण करती है। लेकिन सरकार इसके बदले जमीन के मालिक को उचित मुआवजा देती है। अब सवाल आता है कि क्या सरकार बिना मुआवजे भी किसी की संपत्ति को लेने का अधिकार रखती है। इसपर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का बड़ा फैसला आया है, आइए जानते हैं।
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क्या संपत्ति को दोबारा वितरित कर सकती है सरकार
सरकार के पास काफी पावर है, लेकिन सवाल आता है कि क्या सरकार को निजी संपत्ति का अधिग्रहण कर उसका दोबारा वितरण करने का अधिकार है? ऐसे मामले में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court property rights) के 9 जजों की संविधान पीठ ने इस पर फैसला सुना दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कही अहम बात
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court decision) में 9 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि हर निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं कहा जा सकता है। इससे पहले संविधान पीठ ने सुनवाई के बाद निजी संपत्ति मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अहम फैसला सुनाया है।
पुराने फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने 1978 के बाद के फैसलों को पलट दिया है। जिन फैसलों को पलटा गया है, उनमें समाजवादी विषय को अपनाते हुए कहा गया था कि सरकार आम भलाई के लिए सभी निजी संपत्तियों को अपने कब्जे में ले सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तय कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 39(B) के प्रावधानों के अनुसार निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं कहा जा सकता। किसी की निजी संपत्ति का अधिग्रहण कर इसे जनहित का हवाला देकर वितरित नहीं किया जा सकता है।
पुराने फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court order) में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बहुमत के फैसले को पढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुसार बने कानूनों की रक्षा करने वाला संविधान का अनुच्छेद 31 (C) सही है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि 39 (बी) सामुदायिक संपत्ति के सार्वजनिक हित में वितरण की बात करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार सभी निजी संपत्तियों को सामुदायिक संपत्ति की तरह नहीं देख सकते हैं। ऐसे पुराने फैसले एक खास आर्थिक विचारधारा से प्रभावित थे।
निजी क्षेत्र का आर्थिक ढांचे में काफी महत्व
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सीजेआई की ओर से कहा गया कि आज के आर्थिक ढांचे में निजी क्षेत्र का महत्व है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि हर निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं कहा जा सकता। किसी संपत्ति की सार्वजनिक हित में जरूरत निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति का दर्जा नहीं दे सकती है।
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