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दिन ढलने के बाद झाडू क्यों नही लगाना चाहिए, जान लीजिए वरना कंगाली नही छोड़ेगी पीछा ﹘

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अक्सर आपने कई बार बड़े बुजुर्गों के मुंह से सुना होना, रात को झाड़ू मत लगाओ, तुलसी को मत छूओ और भी कई बातें।

पर क्या आपको यह मालूम है कि ऐसा आखिर क्यों कहा जाता है। आज हम उसी रहस्य से पर्दा उठाने वाले हैं। आइये जानते हैं…

शाम को झाड़ू भूल कर भी नहीं

साधारण दिखने वाली झाड़ू आपको मां लक्ष्मी का आशीष दिला सकती है और वास्तुदोष का भी कारण बन सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार झाड़ू और लक्ष्मी का गहरा रिश्ता बताया गया है। इसके साथ बहुत सारी धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं, जो बड़े-बूढ़ों से हम सुनते आएं हैं।

शास्त्रों में कहा गया है जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है उस घर में सदैव आर्थिक हानि होती रहती है। आईए जानें, झाड़ू से जुड़ी कुछ खास बातें जो कम ही लोग जानते है…

सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाना अशुभता लाता है। झाड़ू को उत्तर दिशा में छिपाकर रखना चाहिए, जहां किसी की नज़र न पड़े।

डाइनिंग हॉल में झाड़ू रखने से परिवार में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। बेडरूम में झाड़ू रखने से दांपत्य संबंधों में दरार आने लगती हैं।

झाड़ू के ऊपर से कूदना नहीं चाहिए। मान्यता है झाड़ू को खड़ा करके न रखें, इससे क्लेश होता है।

झाड़ू को जलाना नहीं चाहिए, इससे देवी लक्ष्मी नाराज़ हो जाती हैं। कहते हैं झाड़ू को घर से बाहर या छत पर रखने से चोरी का दर बना रहता है।

नए घर में पुराना झाड़ू लेकर जाना बेड लक लाता है। झाड़ू को सदैव कृष्णपक्ष में खरीदना उचित रहता है। शुक्लपक्ष में खरीदी गई झाड़ू दुर्भाग्य का सूचक है। झाड़ू हमेशा कड़े वारों में खरीदना चाहिए। सौम्य वारों पर झाड़ू खरीदने पर धन हानि होती है।

झाड़ू लगाते समय कभी भी पांव से उसका स्पर्श नहीं करना चाहिए अन्यथा उन्हीं पांव से चलकर अलक्ष्मी घर में स्थान बनाती हैं। किसी भी जानवर को झाड़ू न मारें विशेषकर गाय को क्योंकि गाय में हिंदू धर्म के 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

सूरज डूबने के बाद घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए. दरअसल, ऐसी मान्यता है कि शाम के वक्त झाड़ू लगाने से लक्ष्मी जी घर के बाहर चली जाती हैं. एक वजह यह भी है कि पुराने जमाने में बिजली नहीं होती थी।

सूरज डूबते ही लालटेन या दीये की रोशनी में लोग काम करते थे. ऐसे में अंधेरे में झाडू लगाते हुए कई बार जरूरी चीजें भी बाहर कूड़े में चली जाती थीं. इसलिए भी इसे नियम के तौर पर माना जाने लगा कि अंधेरा होते ही या दिन ढलने के बाद झाडू नहीं लगाना चाहिए।

शाम को नहीं छूते तुलसी

शाम के वक्त लोग तुलसी के सामने दीप जलाते हैं, उसकी अर्चना करते हैं, पर उसे छूते नहीं हैं और न ही उसे जल चढ़ाते हैं. शाम को तुलसी के सामने दीप जलाने से लक्ष्मी जी की कृपा होती है. लेकिन अगर आप शाम को तुलसी को छूते हैं या उन्हें जल देते हैं तो इससे वो नाराज होती हैं. इस तरह लक्ष्मी जी रुष्ट हो जाती हैं. वो अपनी कृपा नहीं करतीं।

दरअसल, ऐसी मान्यता है कि शाम के समय तुलसी जी आराम करती हैं और छूने से वो जग जाती हैं. नींद में खलल पड़ने की वजह से वो भक्त को अपने आर्शिवाद से महरूम कर देती हैं. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रात के समय पौधों को पानी नहीं देना चाहिए. पौधों के भी सोने और जागने का वक्त होता है. ऐसे में यदि आप उन्हें रात में पानी देंगे तो उनकी सेहत खराब हो सकती है और वो मुर्झा सकते हैं।

गुरुवार को क्यों नहीं करते शेविंग

वीरवार को आमतौर पर लोग बाल और दाढ़ी नहीं बनवाते. गुरुवार को ये गलती लोग भूल कर भी नहीं करते. दरअसल, गुरुवार को बृहस्पति यानी कि देवताओं के गुरु का दिन माना जाता है. ये धारणा है कि बृहस्पति भाग्य के कारक होते हैं. ऐसे में यह मान्यता है कि गुरुवार को जो लोग बाल कटाते हैं और शेविंग करते हैं, उनका भाग्य खराब हो जाता है।

सूरज ढलने के बाद नहीं किये जाते ये काम

इसके पीछे की एक वजह यह है कि पहले बिजली नहीं रहा करती थी और अंधेरे में नाखून काटना जरा जोखिमभरा काम था. इसके अलावा लोगों के पास तब नेलकटर भी नहीं हुआ करते थे, वो चाकू, ब्लेड या कैंची से नाखून काटते थे।

दूसरा, इसका धार्मिक पक्ष यह है कि रात में नाखून काटने से लक्ष्मी जी नाराज होती हैं. उन्हें रात में नाखून काटना बिल्कुल पसंद नहीं है. ऐसे व्यक्ति पर लक्ष्मी अपनी कृपा नहीं दिखाती और उसे धन की हानि भी होती है।

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