वाराणसी, 5 अप्रैल . “नौमी तिथि मधु मास पुनीता. सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता” पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी. शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित् मुहूर्त था, इसी दिन दशरथ नंदन का जन्म हुआ. रामचरितमानस की यह चौपाई बालकाण्ड में वर्णित है जो प्रभु के जन्म का उद्घोष करती है. 6 अप्रैल 2025 को भारत भूमि प्रभु का जन्मोत्सव मनाएगी. भगवान भाव के प्रेमी हैं लेकिन कुछ नियम हैं जिन्हें विधिवत किया तो कृपा जरूर बरसेगी.
वाराणसी के कर्मकांडी ज्योतिषाचार्य रत्नेश त्रिपाठी के अनुसार, सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नहा लें. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान राम की मूर्ति या तस्वीर को फूल, चंदन और चावल से सजाएं. फिर राम रक्षा स्तोत्र या रामचरितमानस पढ़ें और उनकी आरती करें.
यह काम दिन की शुरुआत को भक्ति से भर देता है. इसके अलावा रामायण या रामचरितमानस का पाठ करना भी बहुत अच्छा माना जाता है. खास तौर पर अयोध्याकांड की कहानी पढ़ें, जो श्री राम के जन्म से जुड़ी है. इससे मन में सकारात्मक सोच आती है और भक्ति बढ़ती है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं.
पंडित जी के अनुसार फलाहार या निर्जला व्रत कर सकते हैं. व्रत के दौरान भगवान राम का नाम लें और मन को शांत रखें. साथ ही गरीबों की मदद करना न भूलें. उन्हें खाना, कपड़े या पैसे दान करें. ऐसा करने से पुण्य मिलता है और भगवान की कृपा बनी रहती है. अगर मुमकिन हो तो पास के राम मंदिर में जाएं. वहां दर्शन करें और भजन-कीर्तन में हिस्सा लें. इससे मन को बहुत सुकून मिलता है.
घर पर प्रसाद बनाना भी इस दिन का खास हिस्सा है. खीर, हलवा या पंजीरी बनाएं और पहले इसे भगवान को चढ़ाएं. फिर परिवार और पड़ोसियों में बांट दें. यह खुशहाली फैलाने का अच्छा तरीका है.
इसके बाद परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर श्री राम के भजन गाएं. उनकी जिंदगी की कहानियां सुनें और सत्संग करें. इससे घर का माहौल पवित्र बनता है और भक्ति का भाव जागता है.
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एसएचके/केआर
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