आजकल तकनीक ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही खतरनाक भी। OpenAI का ChatGPT, जो अब तक सवालों के जवाब देने और क्रिएटिव कंटेंट बनाने के लिए जाना जाता था। फिलहाल, इसका Ghibli ट्रेंड खूब वायरल रहा है। लेकिन यह AI अब फर्जी दस्तावेज बनाने में भी माहिर हो गया है! हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि ChatGPT के जरिए आधार और पैन कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेजों की नकली कॉपी आसानी से बनाई जा सकती हैं।
सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है वायरल?एक X यूजर यशवंत साई पलघाट (@yaswanthtweet) ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा- ChatGPT तुरंत नकली आधार और पैन कार्ड बना रहा है। यह एक गंभीर सुरक्षा जोखिम है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई तकनीक को नियंत्रित करना अब जरूरी हो गया है। वहीं, एक अन्य यूजर पिकु (@RisingPiku) ने लिखा- मैंने सिर्फ नाम, जन्मतिथि और पता देकर आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की और AI ने लगभग असली जैसा दिखने वाला डॉक्यूमेंट बना दिया। सवाल यह है कि आखिर ये AI कंपनियां आधार और पैन कार्ड का डेटा कहां से पा रही हैं?
क्या सच में खतरा इतना बड़ा है? हालांकि ChatGPT असली व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग नहीं करता, लेकिन यह फर्जी आईडी बनाने में सक्षम है, जो साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है! इससे न केवल पहचान चोरी का खतरा बढ़ता है बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कई गुना बढ़ सकती हैं।
समाधान क्या हो सकता है?
सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है वायरल?एक X यूजर यशवंत साई पलघाट (@yaswanthtweet) ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा- ChatGPT तुरंत नकली आधार और पैन कार्ड बना रहा है। यह एक गंभीर सुरक्षा जोखिम है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई तकनीक को नियंत्रित करना अब जरूरी हो गया है। वहीं, एक अन्य यूजर पिकु (@RisingPiku) ने लिखा- मैंने सिर्फ नाम, जन्मतिथि और पता देकर आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की और AI ने लगभग असली जैसा दिखने वाला डॉक्यूमेंट बना दिया। सवाल यह है कि आखिर ये AI कंपनियां आधार और पैन कार्ड का डेटा कहां से पा रही हैं?
क्या सच में खतरा इतना बड़ा है? हालांकि ChatGPT असली व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग नहीं करता, लेकिन यह फर्जी आईडी बनाने में सक्षम है, जो साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है! इससे न केवल पहचान चोरी का खतरा बढ़ता है बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कई गुना बढ़ सकती हैं।
समाधान क्या हो सकता है?
इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या एआई तकनीक पर सख्त निगरानी की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और टेक कंपनियों को मिलकर ऐसे उपाय करने चाहिए ताकि इस तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके।
वैसे क्या आपको लगता है कि एआई तकनीक पर नियंत्रण जरूरी है या इसका सही इस्तेमाल समाज को बेहतर बना सकता है? अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें!
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