भुवनेश्वर: दो दिनों की लंबी बहस के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। राज्यसभा में इस विधेयक को उम्मीद से ज्यादा 128 वोट मिले। वोटिंग से पहले इस विधेयक का पहले विरोध करने वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) ने पलटी मारी और अपना व्हिप वापस ले लिया। सांसदों को अंतरआत्मा के अनुसार वोट करने की छूट दे दी। इसके बाद बीजेपी के 7 सांसदों ने वक्फ बिल के पक्ष में मतदान कर दिया। नवीन पटनायक ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी से अपनी दोस्ती निभा दी। बीजेडी गैर एनडीए की पहली पार्टी बन गई, जिसने सीएए, कश्मीर से 370 हटाने और वक्फ बिल जैसे मुद्दों पर बिना शर्त समर्थन देकर मोदी सरकार की राह आसान कर दी। बीजेडी और बीजेपी में तकरार क्यों बढ़ीपिछले ओडिशा विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी और बीजेडी के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। बीजेपी ने बीजू जनता दल के मुखिया नवीन पटनायक के स्वास्थ्य को मुद्दा बनाया था। उनके करीबी आईएएस वीके पांडियन के प्रभुत्व को चुनौती देते हुए बीजेपी ओडिया अस्मिता पर भी बीजेडी घेर लिया। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 78 सीटों के साथ पहली बार ओडिशा में सरकार बनाई और नवीन पटनायक के 24 साल के शासन को समाप्त कर दिया। बीजेडी सिर्फ 51 सीटों पर सिमट गई। बीजू जनता दल 2017 में एनडीए का हिस्सा बना। नवीन पटनायक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। दोनों पार्टियों ने दो बार एक साथ विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल कर सरकार बनाई। पहले भी नवीन पटनायक बने संकटमोचक2009 में जब बीजेडी एनडीए से अलग हुई, इसके बाद से बीजेपी ओडिशा में विपक्ष की हैसियत में आ गई। इसके बाद भी बीजेपी-बीजेडी के बीच अघोषित तालमेल बना रहा। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद नवीन पटनायक केंद्र के और करीब आए। पीएम मोदी से उनकी दोस्ती का असर यह रहा कि सीएए, कश्मीर से 370 हटाने समेत सभी बड़े मौकों पर बीजू जनता दल ने संसद में मोदी सरकार का समर्थन किया। नरेंद्र मोदी ने इस रिश्ते का लिहाज किया। चुनावी सभाओं में वह बीजेडी सरकार को कोसते रहे मगर नवीन पटनायक को 'दोस्त' बताते रहे। उन्होंने कभी पटनायक पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए। पीएम मोदी अपने विपक्षी नेताओं के लिए रहमदिल नहीं माने जाते हैं। ओडिशा में हार के बाद बीजेडी ने कड़े किए तेवरविधानसभा चुनाव में हार के बाद नवीन पटनायक ने ओडिशा और दिल्ली में विपक्षी दल बनने का फैसला किया। लोकसभा में बीजू जनता दल के सांसद नहीं हैं, मगर राज्यसभा में मुखर विपक्ष बनने का ऐलान मोदी सरकार के लिए बड़ी प्रॉब्लम थी। राज्यसभा में बीजेपी के 98 सांसद हैं। वक्फ बिल पास कराने के लिए उसे 119 सांसदों की जरूरत थी। एनडीए के घटक और मनोनीत सदस्यों को जोड़कर यह आंकड़ा 121 तक पहुंच गया था। मगर बीजू जनता दल का विपक्ष के खेमे में जाना बीजेपी के लिए बड़ा संदेश साबित होता। अगर अब बीजेडी विरोध में मतदान करती तो आने वाले समय में महत्वपूर्ण विषय पर बीजेपी को राज्यसभा में छोटे सहयोगियों के मुंह ताकने पड़ते। नवीन पटनायक ने न अपने सांसदों के हाथ खोले बल्कि उन्हें बिल के समर्थन में खड़ा कर दिया। इससे इंडिया गठबंधन में शामिल दलों को भी बड़ा झटका लिया।
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