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वजन घटाने के लिए 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग कारगर, लेकिन जोखिमों से रहना होगा सावधान

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वजन घटाने के लिए 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग कारगर, लेकिन जोखिमों से रहना होगा सावधान

अगर आप तेजी से वजन घटाने का तरीका ढूंढ रहे हैं, तो हाल ही में आई एक स्टडी आपके लिए राहत की खबर ला सकती है। एक नई रिसर्च के मुताबिक, 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग—जिसमें सप्ताह के चार दिन सामान्य आहार और तीन दिन सीमित कैलोरी ली जाती है—परंपरागत रोज़ाना कैलोरी नियंत्रण की तुलना में अधिक प्रभावशाली साबित हो सकती है। यह स्टडी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है और इसमें मोटापे से जूझ रहे लोगों को 12 महीनों तक फॉलो किया गया।

हालांकि इस डाइट पैटर्न के नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के अपनाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। गलत तरीके से फॉलो करने पर पोषण की कमी, हार्मोनल असंतुलन, डिहाइड्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव जैसे खतरे हो सकते हैं।

फास्टिंग से वजन घटाने में मदद, पर सतर्कता जरूरी

फरीदाबाद स्थित मेट्रो हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. विशाल खुराना बताते हैं कि इस तरह के फास्टिंग पैटर्न में पोषण की कमी एक गंभीर समस्या बन सकती है। जब तीन दिनों तक लगातार कैलोरी कम की जाती है, तो शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाते, जिससे कमजोरी, थकावट और इम्यूनिटी में गिरावट आ सकती है।

डॉ. खुराना यह भी चेतावनी देते हैं कि यह डाइट पहले से डाइटिंग या ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ चुके लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। साथ ही, डिहाइड्रेशन, नींद में गड़बड़ी, दिल या किडनी से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए यह तरीका नुकसानदेह साबित हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और मासिक धर्म की अनियमितता की भी आशंका हो सकती है।

थकावट, चिड़चिड़ापन और मानसिक दबाव

पोषण विशेषज्ञ सुवर्णा सावंत का कहना है कि 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग दिल की सेहत और वजन घटाने के लिहाज से प्रभावी हो सकती है, लेकिन इसे केवल किसी अनुभवी डाइटिशियन की देखरेख में ही अपनाना चाहिए। हर व्यक्ति की शरीर की ज़रूरतें अलग होती हैं, इसलिए एक ही डाइट सभी पर समान रूप से लागू नहीं होती।

वह बताती हैं कि अगर इस डाइट के दौरान संतुलित भोजन नहीं लिया गया, तो व्यक्ति थकान, चिड़चिड़ापन और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं का शिकार हो सकता है। कुछ मामलों में खाने को लेकर अत्यधिक सोचने की आदत या डाइट से जुड़ी मानसिक परेशानियां भी उभर सकती हैं।

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