नई दिल्ली, 01 अप्रैल . राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों में भूमिका के संबंध में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ आगे की जांच करने का आदेश दिया है. एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन को स्वीकार कर लिया. इसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी कपिल मिश्रा के मामले में लापरवाही बरतने पर ज्योति नगर थाने के एसएचओ पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से पेश की गई सामग्री के आधार पर उनकी उपस्थिति कर्दम पुरी के इलाके में थी और उनके खिलाफ संज्ञेय अपराध पाया गया है, जिसकी जांच की जानी चाहिए. इसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि या तो जांच अधिकारी ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई जांच नहीं की या उसने कपिल मिश्रा के खिलाफ आरोपों को छिपाने की कोशिश की. कोर्ट ने कहा कि कपिल मिश्रा सार्वजनिक व्यक्ति हैं और उनके बारे में ज्यादा जांच की जरूरत है, क्योंकि ऐसे लोग जनता के मत को सीधे-सीधे प्रभावित करते हैं. सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति से संविधान के दायरे में रहने की उम्मीद की जाती है.
कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि कपिल मिश्रा के बयान सांप्रदायिक सद्भाव पर बुरी तरह असर डालते हैं. ऐसे बयान अलोकतांत्रिक होने के साथ-साथ देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर हमला है. ऐसे बयान संविधान के मूल चरित्र का खुला उल्लंघन है. कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए सांप्रदायिक और धार्मिक सद्भाव से जुड़ा हुआ है. ये देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है.
/संजय———–
/ सुनीत निगम
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