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जंगल में सरकार रहती है : नवीन रांगियाल की कविता

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जंगल में एक शेर रहता था

कुछ हिरण रहते थे

हाथी रहते थे

चिड़िया रहती थी

कौए रहते थे

कीड़े

पतंगे

फूल

पेड़

तितलियां

कबूतर

और परिंदे रहते थे

अब जंगल में दरिंदे रहते हैं

अब जंगल में

आदमी रहता है

जेसीबी रहती है

कुल्हाड़ियां रहती हैं

आरियां

और आरियां लेकर खड़े अफसर रहते हैं

सरकारी विभाग और फ़ाइलें रहती हैं

जंगल में

नदी

झील

तालाब

और पगडंडियां रहती थीं

अब जंगल में पुल, सड़कें

मंत्री, संत्री, विधायक

लाल बत्ती की गाड़ियां रहती हैं

जंगल में एक चांद

एक सूरज रहता था

जंगल में सिर्फ जंगल रहता था

अब जंगल में शहर से चलने वाली सरकार रहती है।

(हैदराबाद यूनिवर्सिटी से सटी 400 एकड़ जमीन पर तेलंगाना सरकार बुलडोज़र चलाकर जंगलों को उजाड़ रही है। तथाकथित विकास के नाम पर पर्यावरण और हजारों वन्यजीवों के घरों में सरकारी घुसपैठ की जा रही, क्या जंगलों को उजाड़कर ही विकास किया जाएगा, यह विकास है या विनाश)

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

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